Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

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मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

अध्यात्मिक अभ्यास सभी के लिए अनिवार्य होता है

एक प्रश्न उठता है - क्या अध्यात्मिक  अभ्यास सभी लोगों के लिए है या केवल उन लोगों के लिए जो आध्यात्मिकता के इच्छुक हैं ?
उत्तर है :- अध्यात्मिक  अभ्यास सभी के लिए होता है, उस स्तर पर जिन पर वे आसानी से अभ्यास कर सकते हैं । केवल अध्यात्मिक  अभ्यास हमारी रक्षा " तेज़ रफ़्तार जिंदगी जिसमें हम वर्तमान में रहते हैं " और उसकी सभी नकारात्मक प्रभावों से करता है ।
                                                    
आज के युग में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा एवं तनाव है । गला काट अभ्यास अधिकांश की उच्च पर रहने में और तरक्की करने में सहायता करता है । ऐसे गंभीर अभ्यास शरीर एवं मस्तिष्क को अवसादग्रस्त करते हैं । आधुनिक युग की चूहा दौड़ में कुछ लोग जीतते है या पराजित होते हैं और पराजित व्यक्ति केवल पराजित रहते हैं । जीवन -अधिकार , प्रतिष्ठा , पद ,शक्ति ,लालसा और सांसारिक चमक धमक के चारों और घूमता है । इस दुष्चक्र में पड़कर, मनुष्य को कोई राहत नहीं होती है ।
                                                                                      
प्रत्येक व्यक्ति को विकसित होने और आगे बढ़ने की आवश्यकता होती है । और यह केवल अध्यात्मिक  अभ्यास से संभव होता है " ईश्वरत्व की झलक जो हमारे अन्दर - हमारी अन्तःचेतना में होती है " की मांग जो हमे विकसित करती है और हमें आगे बढाती है । यह तभी संभव होता है जब हम अपने चारों ओर की नकारात्मकता से सुरक्षित होते हैं । हमारे चारों ओर की नकारात्मक ऊर्जाएं एवं प्रभाव हमारे अन्दर की रचनात्मक ऊर्जा को " जिससे उन्नति प्रशस्त होती है " नष्ट करती है और तटस्थ बनाती है ।
                                             
जब हम मंत्र जाप का , धार्मिक पुस्तकों को पढने का, नियमित मन्दिर दर्शन का , श्लोक का सस्वर पाठ, ध्यान का अभ्यास करते हैं , हमारे तन्त्र में उच्चतर चक्र चलायमान हो जाते हैं । समर्पण हमारी भावनाओं और मस्तिष्क को शुद्ध करता है और हमारी विचार धाराओं को  मार्गदर्शन देता है । जब हम प्रेमवश स्वयं को ईश्वर की इच्छा में समर्पित करते हैं तो हमारे समर्पण का आभार बढ़ता है और हम जीवन की नकारात्मकता और अनियमितता से सुरक्षित होते हैं । इस प्रकार हमारा अभ्यास बढ़ता है , और समर्पण पुष्ट होता है और शुद्ध होता है तीसरा नेत्र विकसित होता है । ईश्वर  की इच्छा को देखने और समझने का अन्तर्ज्ञान एवं क्ष्रमता और स्रष्टि की भव्य योजना इस अभ्यास से आती है । हमारे अन्दर का भय, क्रोध, इर्ष्या और दूसरी नकारात्मकता नष्ट होती है | हम प्रत्येक समय अपने को सुरक्षित रखने वाले ईश्वर के अद्रश्य हाथ का अनुभव करते हैं ।
                                                                                                                                                 
सिद्ध मंत्र जाप का अध्यात्मिक अभ्यास - सीता राम और अन्य मन्त्र और ध्यान , गुरु सेवा एक अर्थपूर्ण जीवन को जीने का सबसे सरल मार्ग है। भौतिक एवं अध्यात्मिक जीवन में हमारी उन्नति निर्बाध रूप से जारी रहती है । हम अपने को सुरक्षित रखने वाले  ईश्वर के आशीर्वाद और गुरु के हाथ को हर समय देखते हैं ।