Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

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सोमवार, 29 अप्रैल 2013

आप इस लोक के दिव्य प्राणी हो

ब्रम्हाण्ड बहुत विशाल है । इस ब्रम्हाण्ड में लगभग 10,000 लोक हैं और सबसे ऊँचा लोक वैकुण्ठ लोक होता  है । वैकुण्ठ भगवान् विष्णु का निवास है ।  जो लोग सीता राम मंत्र का जाप करते हैं, इस लोक के पथ पर होते हैं और जिन्होंने कुण्डलिनी महा योग का शक्तिपात लिया है और निष्ठावान गुरु भक्त हैं , निश्चित रूप से उस आश्चर्यजनक लोक को प्राप्त करेंगे । वैकुण्ठ लोक के निवासी अव्यक्त से सीधे संपर्क में होते हैं जिसे स्वयं में श्री विष्णु के रूप में स्पष्ट किया गया है । 
                                            
दूसरे लोक भिन्न प्रकार के प्राणियों से बसे हुऐ हैं । वे उन्नति का अलग स्तर और अलग प्रकार का उपहार रखते हैं । प्रत्येक प्राणी अपने लोक के लिए अलग प्रकार  की प्रकृति तथा विशेषताओं सहित अनूठा होता है । भूलोक मिलन का केंद्र होता है - वह स्थान जहाँ भिन्न-२ प्रकार के प्राणी साथ-2  आते हैं एवं सदभाव में सह अस्तित्व में होते हैं ।  ब्रम्हाण्ड में यही एक स्थल है जो सभी सार्वभौमिक संस्कृति को एक सूत्र में पिरोता है । 
                                                    
आप दिव्य प्राणी हैं जो इस लोक के अस्थायी निवासी हैं । आप कुछ उद्देश्य के लिए यहाँ आये हैं और एक बार जब यह संपन्न हो जाता है, आप वैकुण्ठ को वापस लौट जायेंगे । फिर भी याद रखो, आप संक्षिप्त ठहराव के लिए यहाँ हैं और आप यहाँ एक मेहमान हैं ।  आप यहाँ इस लोक के एक किस्म के प्राणियों के साथ रह रहे हैं इसलिये सभी के साथ शांति एवं सदभाव में रहिये । 
                                       
आपको यह याद रखना चाहिए कि प्रत्येक प्राणी आप ही कि तरह अपना अनूठा मार्ग एवं पसन्द एवं नापसन्द रखता है । आपके चारों ओर कुछ  लोग धार्मिक पुस्तकें पढना पसंद करते हैं कुछ लोग मूर्ति पूजा पसन्द करते हैं, कुछ प्रकृति को पूजते हैं, कुछ संगीत एवं कला में ईश्वरत्व को देखते हैं । प्राणियों में कुछ जीवन पथ के रूप में ईश्वरत्व पर ध्यान करते हैं और दूसरे ईश्वर के पवित्र नाम को गाने में विश्वास करते हैं । प्रत्येक प्राणी यहाँ ईश्वर के अपने पथ पर चल रहा है और हमें इनका सम्मान करना चाहिए । हम भी अपने पथ पर चल रहे हैं । इसलिए आपको यहाँ इस पृथ्वी पर दूसरों के प्रति सम्मान एवं समझ के साथ समय व्यतीत करना चाहिए । यह आपके ठहराव को यहाँ आनन्दपूर्ण एवं स्वीकार्य बनाएगा । और हर समय सीता राम मंत्र को जपना याद रखिये जो आपकी सुरक्षा और दूसरे लोक का आज्ञापत्र होता है और जो अद्रितीय रूप से आपका है ।