जब शिष्य गुरु के सामने बैठता है, यह दर्शन होता है । मौन दर्शन अत्यधिक लाभकारी होता है । प्रोत्साहन जो कोई गुरु के औरा से प्राप्त करता है , शक्तिशाली होता है और यह मन्त्र जाप और बाद के ध्यान के गुणों को प्रभावित करेगा । गुरु के शरीर से विकिरण का तात्पर्य होता है ॐ के लौकिक प्रकाश और ध्वनि का अनावरण । गुरु के सामने मौन बैठना शरीर एवं मस्तिष्क को महान शक्ति देता है । गुरु से उत्पन्न प्यार और शांति तंत्र को प्रफ्फुलित करती है और स्वस्थ करती है ।
जब शिष्य गुरु के समीप हो, उसे आदरपूर्ण ढंग से मौन बैठना चाहिए । प्रश्न पूछने की आवश्यकता नहीं है । उसका ध्यान गुरु पर होना चाहिए । जो गुरु जी कह रहे हों उसका संपूर्ण ध्यान उन पर होना चाहिए । ऐसा कर के वो अनमोल शिक्षा सीखेगा जो सीखना एवं जानना कठिन होता है और किसी अन्य के द्वारा आसानी से नहीं सिखाया जा सकता है । गुरु जानते है की कौन सी जानकारी शिष्य के उन्नति के प्रोत्साहन के लिए आवश्यक होती है और कौन सा ज्ञान प्रदान करना है और किस प्रश्न का उत्तर देना आवश्यक है । इसलिए शिष्य के लिए प्रश्न पूछना आवश्यक नहीं है ।
यदि शिष्य अपने प्रश्नों को पूछने के अवसर को केन्द्रित करके गुरु के सम्मुख बैठता है , दर्शन अपूर्ण माना जायेगा । उसका संपूर्ण ध्यान और ऊर्जा पूछने वाले प्रश्नों पर केन्द्रित होगी और वह प्रश्न पूछने के लिए उचित अवसर का इंतज़ार करेगा । उसका ध्यान उठने वाले प्रश्न और बातचीत के अन्तराल पर होगा, इस बात पर नहीं के गुरु जी क्या बोल रहें हैं । ऐसा कर के वह शब्दों द्वारा प्रदान किये गए दोनों ज्ञान को खो देता है और गुरु से आशीर्वाद और प्रसारण को प्राप्त करने के भी योग्य नहीं होगा क्योंकि उसमें मौन नहीं है ।
अतः गुरु से प्रश्न पूछने की आवश्यकता नहीं है । वे बिना पूछे हुए अधिकांशतः प्रश्नों का उत्तर देते हैं । यदि गुरु द्वारा प्रश्नों का उत्तर नहीं भी दिया जाता है तो भी दर्शन का आशीर्वाद सदैव समस्याओं पर मरहम लगाता है और समस्या का समाधान उनसे प्राप्त होता है । स्व और अध्यात्मिक उन्नति की वृद्धि के परिणामो के बिना पूछे गए प्रश्नों में सामान्यतः शिष्य अपनी संपूर्ण ऊर्जा एवं ध्यान को बर्बाद करता है । यदि वह कुछ पूछना चाहता है तो शिष्य को केवल वही बोलना चाहिए जो गुरु उससे पूछें ।
गुरु देने की असाधारण क्ष्रमता रखते है । इसलिए शिष्य को मौन बैठना चाहिए और अधिकाधिक जितना वह प्राप्त कर सकता है , प्राप्त करना चाहिए।