Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

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शुक्रवार, 3 मई 2013

धोखा एवं आदर्श जीवन

हमलोग काल की अल्प अवधि के लिए पृथ्वी पर यहाँ हैं । मानव जीवन इस संसार में लगभग 70 से 80 वर्ष का होता है । कभी-2  यह कम भी होता है । ओ दिव्य प्राणी, आप पृथ्वी पर एक अस्थायी निवासी हो । आप यहाँ मेहमान हो । अपने व्यवहार को तदानुसार आदर्श बनाइये ।
                                                                   
आपको व्यवहार के उदाहरणों में एक धोखे से दृढ़ता पूर्वक बचने की आवश्यकता है ।  किसी को धोखा न दीजिये और केवल अपने किये हुए कार्य हेतु उनसे सम्पर्क कीजिये  । यह भयानक रूप से अनुचित होता है और ऐसे आचरणों के  कार्मिक परिणाम भय उत्पन्न करने वाले होते  है । कोई व्यक्ति धोखा खाना एवं दूसरे के द्वारा अनुचित दबाव डालने को पसन्द नहीं करता है । इसलिए दूसरों के प्रति ऐसा न करने के प्रति सावधान रहना चाहिए एवं दूसरों के द्वारा धोखे का शिकार भी नहीं होना चाहिए ।
                                                                   
किसी के लिए किये गए कार्य में उसपर  दबाव डालना अनुचित होता है । आपके प्रति किये गए कार्य में एक व्यक्ति को धोखा देना जब वह अनिच्छुक हो, उसे धोखा देना होता है ।  भावात्मक धोखा सबसे निम्न स्तर का धोखा होता है । प्रेम का प्रयोग करना, आपके प्रति किये गए कार्य में भावात्मक निर्भरता या मित्रता और दूसरे के लिए चाल चलना/ धोखा देना पूर्णतयः अनुचित होता है । आचरण के ऐसे अनचाहे स्वरूपों में आसक्त न होइये ताकि बाद के भयंकर कार्मिक परिणामों के कष्ट को न सहना पड़े  ।
                                 
कपट और दिखावटीपन शर्मनाक होते हैं और उनलोगों के लिए मूल्यहीन होते हैं जो सीता राम मन्त्र का जाप करते हैं एवं जो कुण्डलिनी योग का ध्यान करते हैं । ऐसे आचरण किसी मेहमान के लिए मूल्यहीन होते हैं जब वह अल्प अवधि के लिए ठहरने मेजबान के घर में आया हो । स्वयं का सावधानी पूर्वक आकलन कीजिये और अपने विचार एवं आचरण को सुधारिये । अपने विचार, वाणी एवं कार्य सभी में प्यार, स्नेह और निष्कपटता लाइए सीता राम मन्त्र आपकी सदैव रक्षा करे ।