Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

सोमवार, 13 मई 2013

नन्दानर- आर्द्र दर्शन


कल आर्द्र दर्शन का दिवस है । यह हिन्दू पंचांग के पौष माह में पूर्णिमा का दिन होता है । यह भारत में वर्ष की सबसे बड़ी रात्रि होती है । भोर के पूर्व के समय, जब आकाशीय सितारा -थिरुवादरी /आर्द्र आकाश में उगता है, दक्षिण भारत में सभी शिव मन्दिरों में भगवान् शिव की पूजा की जाती है । यह नन्दानर, दक्षिण भारत के एक साधु की की मुक्ति का दिन भी होता है । नन्दानर भगवान् शिव में गहरी आस्था एवं विश्वास के लिए और अपने भक्तों पर प्रभु की महान दया के लिए जाने जाते है । 
                                            
नन्दानर दक्षिण भारत में पैदा हुए एक साधु थे । वह अछूत के रूप में पैदा हुए थे और एक मजदूर की तरह अपने मालिक के धान के खेतों में काम करते थे जो एक ब्राह्मण था । नन्दानर एक मेहनती मजदूर थे और अपने मालिक के लिए अथक परिश्रम करते थे  लेकिन उनके मालिक ने कभी नन्दानर द्वारा प्रदर्शित निष्ठा की सराहना नहीं की । प्रतिदिन मालिक नन्दानर के कार्य का निरिक्षण किया करता था और भगवान शिव की महानता तथा उनके चमत्कारों का बखान किया करता था। हर समय भगवान् शिव की सहानुभूति एवं प्रेम के बारे में सुनकर नन्दानर में भगवान् शिव के प्रति भक्ति उत्पन्न हुई । 
                                                                                                   
नन्दानर ने अपने दिल एवं दिमाग में भगवान् शिव के लिए ऐसा प्रचण्ड प्रेम उत्पन्न किया कि उनके मन में शिव-शिव के अतिरिक्त कोई विचार नहीं रहा । यह उनकी चिदम्बरम के मन्दिर के दर्शन हेतु प्रचण्ड भक्ति थी । वे चिदम्बरम के  भगवान् शिव के मन्दिर दर्शन हेतु स्वीकृति के लिए अपने मालिक से कहा करते थे और उनका मालिक अक्सर मन कर देता था । एक बार उन्होंने अपने मालिक को इतना अधिक तंग किया कि  उनका मालिक आवेशित हो गया और उनसे एक दिन में विशाल खेत को जोतने के लिए कहा और काम को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेने पर वे चिदम्बरम में दर्शन हेतु जा सकते हैं । 
                                                                                                                                            
नन्दानर असहाय थे क्योंकि इस कार्य को पूरा करना मानवीय रूप से संभव नहीं था । उन्होंने भगवान् शिव से दया हेतु करुण क्रंदन किया । वे  भगवान के प्रति अपनी प्रार्थना में इतना तल्लीन थे कि  उन्होंने गुज़रे हुए समय का भी ध्यान नहीं दिया । दूसरे प्रातः जब वे खेत पर गये, चमत्कारिक रूप से, सभी धान कटा हुआ था और ढेरों में बँधा हुआ था और बड़े करीने से खड़ा हुआ था और ब्राह्मण चिदम्बरम में मन्दिर दर्शन हेतु नन्दानर को स्वीकृति देने के लिए बाध्य था । 
                                             
इस प्रकार नन्दानर ने चिदम्बरम की ओर कदम बढाया, उन्होंने एक शिव मन्दिर को देखा । एक अछूत के रूप में, उन्हें अन्दर जाने की आज्ञा नहीं थी । दरवाजे पर खड़े होकर, उन्होंने अन्दर प्रभु के दर्शन की चेष्टा की । वे अन्दर शिवलिंग को नहीं देख सके क्योंकि नन्दी की मूर्ति दर्शन को बाधित कर रही थी । नन्दी एक बैल हैं  और वे  भगवान् शिव के महान भक्त हैं  और उन्होंने आशीर्वाद प्राप्त किया है कि वे भगवान् की नज़रों के सामने और सीधी रेखा में सदैव खड़े होंगे । नन्दानर के कष्ट और दर्शन हेतु उसकी उत्कंठा को देखकर , भगवान् शिव ने नन्दी को एक ओर हटने के लिए कहा और नन्दानर को दर्शन प्राप्त करने की स्वीकृति दी और नन्दी की पत्थर की मूर्ति एक ओर हट गई और नन्दानर पवित्रतम स्थल के अन्दर शिवलिंग का दर्शन प्राप्त कर सके । उस दिन से नन्दी की मूर्ति  उस मंदिर में केंद्र बिंदु से थोडा दूर है। 
                                                               
जब नन्दानर चिदम्बरम पहुंचे, उन्हें मन्दिर के अन्दर प्रवेश की आज्ञा नहीं दी गई क्योंकि वे नीची जाति के थे । मन्दिर के ब्राम्हणों ने उनसे कहा कि यदि वे आग में स्नान करे केवल तभी वे मन्दिर में प्रवेश के लिए पूर्णतयः शुद्ध होंगे । नन्दानर ने अग्नि को प्रज्वलित किया और उसमे प्रवेश कर गए । जैसे ही वे बाहर आये वे चमकीले सुनहरे प्रकाश में रूपांतरित थे । उन्होंने मन्दिर में प्रवेश किया और भगवान् के दर्शन किये ।  भगवान् शिव के प्रति उनकी लालसा इतनी अधिक थी कि वे शिवलिंग में समाहित हो गए और शिव की सार्वभौमिक चेतना के साथ एकाकार हो गए । 
                                             
नन्दानर और भगवान् शिव के लिए उनकी भक्ति सभी शिव मन्दिरों में अमरत्व प्राप्त किये हुए है । वे 63 वे नयन मार्श के रूप में से एक भगवान् शिव के महान भक्त हैं और उनको सभी शिव मन्दिरों में ईश्वर के द्वारा सबसे धन्य के रूप में पूजा जाता है । नन्दानर ने हमें शिक्षा दी कि यह बात कोई मायने नहीं रखती कि हमारा जन्म का स्तर , शिक्षा , धन या पद समाज में क्या है । यह मायने रखता है कि ईश्वर के प्रति हम कितना प्रेम रखते हैं । सीता राम आपकी भक्ति को बढायें और नन्दानर की तरह आपको आशीर्वाद प्रदान करें ।