शान्ति जीवन में अनिवार्य है । हम बिना शान्ति के नहीं रह सकते । शान्ति जीवन में आनंद एवं संतोष लाती है । शान्ति जीवन को अर्थपूर्ण जीना सिखाती है । हम इच्छाओं की पूर्ति से अल्प समय के लिए शान्ति पाते हैं । इच्छाओं की पूर्ति हर समय नहीं की जा सकती है । एक इच्छा की पूर्ति और अधिक इच्छाओं को जन्म देती है । जीवन इच्छाओं का चिरकालिक चक्र होता है और उनकी पूर्ति हेतु कार्यरत रहता है । तो क्या शान्ति जीवन में वास्तव में संभव है ?
शान्ति ईश्वर एवं गुरु के सम्मान से हमे मिलती है । इस सम्मान को पाने के लिए हमे हर समय ईश्वर एवं गुरु के जाप, ध्यान और स्मरण का अध्यात्मिक अभ्यास करना चाहिये । ईश्वर और उनके पवित्र नाम का स्मरण हमारे अन्दर ईश्वरीय तरंग पैदा करता है जो हमे शान्ति एवं आनंद से परिपूर्ण कर देती है । क्या ऐसे व्यस्त कार्यक्रम और जीवन शैली युक्त आधुनिक संसार में हर समय ईश्वर को याद करना संभव है ?
हमारी जीवन शैली आज उन गतिविधियों में लिप्त है जिनको 24 घंटे से अधिक समय में पूरा किया जा सकता है । हम अधिकांशतः समय यात्रा करने में, काम करने में, अध्यन करने में, नेट पर और अपनी पसंदीदा शौकों पर व्यतीत करते हैं । ईश्वर और उनके पवित्र नाम के स्मरण के लिए समय निकालना अत्यंत कठिन है । हम अनुभव करते हैं कि कुछ समय के लिए जाप या ध्यान में बैठना या हमारे दैनिक जीवन की भागमभाग के दौरान ईश्वर का स्मरण मात्र भी संभव नहीं है ।
हमारे संपूर्ण दिन की गतिविधियाँ हमें तनाव एवं असंतुष्टि देती है और कोई आंतरिक शान्ति नहीं होती है । हमे इस सत्य को समझना चाहिये, समय और कार्यक्रम को प्रार्थमिकता देनी चाहिए । हमे प्रातःकाल मंत्र जाप और ध्यान में बैठकर समय व्यतीत करना चाहिये । यह हमें स्थिर करेगा और हमें शान्ति तथा उद्देश्य से परिपूर्ण करेगा और हम ध्यान केन्द्रित तरीकों में अपने कार्य को करने के योग्य होंगे । रात्रि को सोने से पूर्व हमें थोडा समय मंत्र का जाप करने में समय व्यतीत करना चाहिये । यह हमें शान्त एवं स्थिर करेगा और शुभ रात्रि निद्रा के लिए आरामप्रद करेगा । तब हम तरोताजा और उल्लासपूर्ण होकर जागेंगे ।
ईश्वर के नाम के स्मरण में पूरे दिन हमें बहुआयामी होना चाहिये । हम पूरी तरह बहुकार्यों पर शानदार रहते हैं । उदाहरण के तौर पर जब हम अपनी कार चलाते हैं, गलत चालकों पर, यातायात प्रकाश पर, आरक्षक पर, मोबाइल पर बात करते हुए, संगीत सुनते हुए , नाश्ते के लिये योजना बनाते हुए, मस्तिष्क में एक रूपरेखा बनाते हुए, निगरानी रखते हैं और यातायात के नियमों का पालन करने में भी पर्याप्त ध्यान केन्द्रित होते हैं, सुरक्षित वाहन चलाते हैं और दुर्घटना से बचते हैं । उसी प्रकार हमें उन्ही दैनिक कार्यों में संलग्न रहते हुए ईश्वर को हर समय स्मरण करने में स्वयं को प्रशिक्षित करना चाहिये । पूरे दिन के कार्य एवं गतिविधियों के दौरान, हमें मस्तिष्क की प्रष्ठभूमि में हर समय ईश्वर के नाम का स्मरण करना चाहिये या मानसिक जाप करना चाहिये । इस प्रकार हम ईश्वर के हर समय स्मरण की आदत को बढ़ाते हैं । यह हमारे कार्यों से हमे विचलित नहीं करेगा और हम कुशलतापूर्वक कार्य का निष्पादन कर सकते हैं । हमारे अन्दर उपस्थित पवित्र तरंगे हर समय हमें तनाव, थके एवं बुझे हुए चेहरे पर नियंत्रण पाने में मदद करती है और अधिक नियंत्रित, ध्यानकेंद्रित और सुधरे हुए ढंग से कार्य करती है ।
आप सब सीता-राम मंत्र का रात दिन हर समय स्मरण करें और शान्ति से रहें ।