Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

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मंगलवार, 7 मई 2013

शान्ति


 हम सब  शान्ति ढूंढते हैं । हम स्वयं में और परिवार के साथ  शान्ति से रहना चाहते हैं । हम अपने मित्रों, समुदाय और राष्ट्र के साथ  शान्ति से रहना चाहते हैं । हम अनुभव करते हैं कि जब हमारी इच्छाऐं पूर्ण हो जाती हैं, हम शान्ति से हो जायेंगे । 
                       
कुछ लोग अधिकाधिक धन कमाने में  शान्ति ढूंढते हैं, कुछ लोग अधिक बड़ी कार एवं घर खरीदकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं,  दूसरे अधिकाधिक कपडे खरीदते हैं और कुछ लोग जेवर खरीदते हैं । बहुत से लोग दूसरों पर शासन करके शान्ति खोजते हैं । कुछ लोग दूसरों पर  शक्ति का संचालन करने में और कुछ लोग अपने भविष्य को आकार  एवं दिशा निर्देश देने में  शान्ति एवं पूर्ति को खोजते हैं । अमीरी, आराम, सुविधा, शक्ति, नियंत्रण, प्रतिष्ठा, अल्प अवधि के लिए थोड़ी पूर्ति एवं  शान्ति दे सकते हैं । 
                                                                                                          
जब इच्छाओं की पूर्ति हो जाती है, कुछ समय के लिए  शान्ति होती है । लेकिन वह शान्ति लम्बे समय तक चरम पर नहीं होती है क्योंकि इच्छाऐं बारम्बार जाग्रत होती हैं । हम अनुभव करते हैं कि हमने शान्ति को प्राप्त कर लिया है । परन्तु क्या मानव इच्छाओं की पूर्ति मात्र से  शान्ति प्राप्त कर सकता है? नहीं । जब एक इच्छा पूरी होती है उसके बाद दूसरी इच्छा अपना स्थान ले लेती है । विज्ञापन एवं प्रकाशन के इस आधुनिक संसार में हमारी इच्छाऐं तेजी से बढती है । वे कभी भी कम नहीं होती हैं । जब हम सदैव बेचैन रहते हैं, हम कैसे  शान्ति पा सकते हैं ?
                                                                                             
जहाँ इच्छाऐं, शक्ति, नियंत्रण,प्रतिष्ठा इत्यादि होती हैं, वहाँ सदैव भय होता है । इस बात का भय होता है कि शक्ति, अमीरी और प्रतिष्ठा हमसे छिन जायेंगी । जहाँ धन, शक्ति, और प्रतिष्ठा उपस्थित होती है, वहाँ हिंसा का कलंक, कष्ट एवं दबाववश भय का कब्ज़ा भी होता है । कोई कैसे जान सकता है कि उसके जीवन में कितना पर्याप्त है ? हम कैसे संतोष का निर्देश चिन्ह निश्चित कर सकते हैं ? मस्तिष्क एवं प्रसन्नता को शान्ति के लिए कितना धन, शक्ति या प्रतिष्ठा संतोषजनक होती है ?
                
आपके संतोष के स्तर का पैमाना वह होता है जो अन्दर से आता है । ईश्वरत्व का आन्तरिक मार्गदर्शन उसे निश्चित करता है । जब कोई सीता राम मंत्र का जाप और ध्यान करने में स्थिर, अनुशासित और नियमित होता है, यह मार्गदर्शन स्वयं से आता है और आप "अपनी इच्छाओं को कैसे सम्हालना है और स्वयं में और जीवन में कैसे संतुष्ट होना है" जान जाते हैं । ईश्वर का प्रेम जो संपूर्ण  जीवन का आधार होता है और शान्ति किसी को मन्त्र की तरंगों से परिपूर्ण करती है। सीता राम मन्त्र  क्रोध, इर्ष्या, नुक्सान, भय, आसक्ति,अभिमान एवं घृणा के तीखे और भद्दे अवगुणों पर कार्य करता है और उनका समापन कर देता है । जब कोई इन भद्दे अवगुणों से छुटकारा पाता है केवल तभी वह अपने अन्दर से उठती हुई शान्ति और संतोष की मधुरता को पाता है और जीवन को अर्थपूर्ण जीना बनाता है । सम्मान जो अध्यात्मिक अभ्यास के दृढ एवं नियमित प्रयत्न से प्रवाहित होता है और सीता राम मन्त्र आपके जीवन को शान्ति से परिपूर्ण कर देगा जो लम्बे समय तक चलने वाली, अपरिवर्तित और चिरकालिक होती है ।