Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

बुधवार, 22 मई 2013

जीवन की अज्ञानता एवं पवित्रीकरण

हम ईश्वर की संतान हैं । हम सब स्वीकार करते हैं कि ईश्वर एक है और वे हमारे माता पिता हैं । फिर भी हम लोग अपने ईश्वरीय स्रोतों को भूल जाते हैं और अज्ञानता एवं कष्ट में रहते हैं । हम यौन आनन्दों में डूबे हुए रहते हैं और हमारी आकांक्षा जीवन की तुच्छ वस्तुओं की होती है । हमारा सम्पूर्ण जीवन संघर्ष में गुजरता है और हम स्वयं को एक शरीर के रूप में महसूस करते हैं और हमारा अहंकार हम पर नियंत्रण करता है और दिशा निर्देश देता है । हमारी आत्मा जो ईश्वरत्व की झलक होती है, उपेक्षित और विस्म्रत हो जाती है । 
                                                                                                                       
परम गुरु हमारे जीवन में ईश्वर और हमारे ईश्वरीय प्रकृति का स्मरण करने का पाठ पढ़ाने के लिये आते हैं और आत्म साक्षात्कार के अन्तिम लक्ष्य तक पहुँचाते हैं । परम गुरु की ज्ञानवाणी और उनकी उपस्थिति हमें इस बात का स्मरण कराती है कि हम वास्तव में क्या हैं और कौन सी बुलन्दियों को हम प्राप्त कर सकतें हैं 
                                                                           
ओ दिव्य प्राणी, आप केवल शरीर नहीं हैं । स्वयं को  इन्द्रियों के कोलाहल और शरीर से न पहचाने । अपने शरीर को ईश्वरत्व एवं सम्पूर्ण समय अधिक ऊँचे उद्देश्य के साथ पहचानें ।  धूप एवं हवा में ईश्वर की कृपा के लिए सचेत रहें इस प्रकार ज्ञानरूपी प्रकाश आपके चेहरे को कान्तिमान बनाएगा या आप स्वांस लेते हैं, उसमें ईश्वर की उपस्थिति आपको पूर्ण करेगी । जब आप जल की एक घूँट लेते हैं, उसकी ताजगी एवं मधुरता के प्रति सचेत रहें जो ईश्वर और गुरु के प्यार की तरह होती है । जब आप अपना भोजन पकाते हैं अपने मन में  सीता राम का जाप करें । भोजन का स्वाद और अधिक बेहतर होता है । इस प्रकार के भोजन को ईश्वर और गुरू को समर्पित करें और तब उसको ग्रहण करें। इसका स्वाद और भी बेहतर होता है । सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपके शरीर के अन्दर होता है । ईश्वरत्व उपस्थित होता है, देवी और देवता आपके शरीर के चक्रों में उपस्थित होते हैं | ईश्वरत्व की झलक आपके ह्रदयरुपी  मन्दिर  में कृपा बनाये रखती है । प्राण शक्ति आपके शरीर के सूक्ष्म कार्य प्रणाली का ईधन होती है  । भोजन जो आप ग्रहण करते हैं, अंततः सौर उर्जा से बनाया जाता है और आपके शरीर का पोषण करता है । हमारे जीवन के चमत्कार ब्रह्मांडीय अनुग्रह पर आधारित होते हैं । 
                                                                   
अपने जीवन को लगातार ईश्वर की कृपा को याद करते हुए पवित्र करें । प्रत्येक स्वांस जो आप लेते हैं, जल की प्रत्येक घूँट जो आप ग्रहण करते हैं, भोजन जो आप खाते हैं, उर्जा जो आपके शरीर के अन्दर और चारों और स्पंदित होती है, तर्क और बुद्धि जो आपके अन्दर कार्य करती है, ये सब ईश्वर का उपहार होते हैं। अपने जीवन के इस प्रत्येक क्षण का स्मरण करें और सीता राम मंत्र का जाप करें और तब आप सांसारिक अस्तित्व से ऊपर उठेंगे एवं अपने जीवन को पवित्र करेंगे, सांसारिकता को समझेंगे और आत्मसाक्षात्कार  के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करेंगे