Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

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मंगलवार, 19 मार्च 2013

पवित्रता एवं अच्छाई

आज संसार में हजारों लोग है जो जीवन में प्रदत्त अपनी  भूमिका को सर्वोत्तम ढंग से  निभाते है :- पुत्र , पुत्री , पत्नी, पति , कार्यकर्ता, नियोक्ता सामाजिक कार्यकर्ता इत्यादि के रूप में । ऐसे लोगों को अच्छे लोग माना जाता है । वे परिवार एवं समाज के स्तम्भ होते है । जब ऐसे लोग अध्यात्मिक मार्ग में उन्नति करने की कामना करते है तब उन्हें अपने नियमित जीवन में भिन्न प्रकार नियमों को जोड़ने की आवश्कता होती है ।

                               
अध्यात्मिक भाषा में अच्छे व्यक्ति और शुद्ध व्यक्ति की परिभाषा सांसारिक भाषा की अच्छे व्यक्ति और शुद्ध व्यक्ति की परिभाषा से भिन्न होती है । अच्छे व्यक्ति की परिभाषा हमारे दैनिक जीवन में बहुत अधिक उन व्यक्तियों के लिए प्रयोग की जाती है जो व्यक्ति बहुत अच्छे  मानवीय  स्वाभाव के जैसे के एक अच्छी माँ, अच्छा विद्यार्थी, पिता , कर्मचारी  एवं एक अच्छा सामाजिक कार्यकर्ता इत्यादि होते है । वे अपनी भूमिका  का निर्वाह बहुत अच्छी तरह से या उससे भी बेहतर ढंग से करते है । वे निर्धन एवं बेसहारा लोगों का ध्यान रखते है । और रात दिन मानव सेवा के कार्यों में लगे रहते है । अध्यात्मिक परिभाषा में ऐसे व्यक्ति केवल अच्छे होते है  लेकिन शुद्ध नहीं ।
                                                              
शुद्धता एक व्यक्ति में पवित्र नाम या मंत्र से आती है । नाम की शुद्ध शक्ति शरीर  की प्रत्येक कोशिकाओं में स्पंदित होती है । वह शरीर मस्तिष्क एवं भावनाओं में  समाहित होती है । यह व्यक्ति को आंतरिक रूप से शुद्ध करेगी । पवित्र नाम या मंत्र से ध्यान भी शुद्धता को प्राप्त करने का असरकारी मार्ग है । 
                                                                                                                        
अतः दिन और रात्रि के सभी समय राम नाम का जाप कीजिये । इस प्रकार आपको अच्छा व्यक्ति बनने से आरम्भ होकर शुद्ध व्यक्ति बनने के लक्ष्य की और जाना है ।