गुलाब का फूळ हमें अपनी नाज़ुक सुंदरता एवं सुगन्ध से आकर्षित करता है । जैसे ही हम फूल के निकट जाते हैं , हमें उसके कांटों से सावधान होने की आवश्यकता होती है । बिना काँटों के कोई गुलाब नहीं होता है ।
हमारा शरीर काम , क्रोध , लोभ , मोह , मद और मत्सर्य ( इर्ष्या ) रुपी काँटों से भरी हुई गुलाब की झाड़ है , जो अपना विद्रूप चेहरा उठाती है और जो मनुष्य हमारे निकट जाते हैं , उन्हें आहत कर देती है ।
सिर में जो सहस्रार चक्र है उसमे एक हज़ार कमलदल है जो की गुलाब है । जब सहस्रार चक्र भक्ति एवं ईश्वर प्रेम से सराबोर होता है , तब वह बहुत ही आकर्षक एवं सुगन्धित हो जाता है । यह पुरस्कार मनुष्य द्वारा माँगा जाता है । तब कोई भी व्यक्ति वासनाओ से युक्त कांटो की परवाह नहीं करता है क्योंकि वासनाओ से युक्त कांटो की धार क्षीण पड़ जाती है |
पंखुड़ियों की सुन्दरता और उसकी मनमोहक सुगंध भक्ति होती है और ईश्वर की अनुकंपा मनुष्य को अपनी ओर आकर्षित करती है । मनुष्य ईश्वर प्रेम एवं अनुकंपा की इच्छा के सही मार्ग में अपने अवगुणों एवं वासनाओ कों भोगकर ज्ञानार्जन करता है ।
क्रमिक , अनुशासित और नियमित रामनाम का जाप किसी के जीवन में उसकी उन्नति लायेगा । अतः सदैव नियमित रूप से राम नाम का जाप कीजिये