Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

Amrit Dhara - Dhyanyogi Omdasji

बुधवार, 13 मार्च 2013

राम नाम की सुगन्ध और गुलाब की झाड़ी

गुलाब का फूळ  हमें अपनी नाज़ुक सुंदरता एवं सुगन्ध से  आकर्षित  करता  है । जैसे  ही  हम  फूल के निकट जाते हैं , हमें  उसके  कांटों  से   सावधान  होने  की  आवश्यकता  होती  है । बिना  काँटों  के  कोई  गुलाब  नहीं  होता  है ।

हमारा  शरीर  काम , क्रोध , लोभ , मोह , मद और  मत्सर्य ( इर्ष्या ) रुपी  काँटों  से  भरी  हुई  गुलाब  की  झाड़  है , जो  अपना  विद्रूप  चेहरा  उठाती  है  और  जो मनुष्य  हमारे  निकट  जाते  हैं , उन्हें आहत कर देती है ।

सिर में जो सहस्रार  चक्र है उसमे एक हज़ार कमलदल है जो की गुलाब है । जब  सहस्रार  चक्र  भक्ति  एवं  ईश्वर  प्रेम  से  सराबोर  होता  है , तब  वह बहुत  ही  आकर्षक  एवं  सुगन्धित  हो  जाता  है । यह  पुरस्कार  मनुष्य  द्वारा  माँगा  जाता  है । तब  कोई  भी  व्यक्ति  वासनाओ  से  युक्त  कांटो  की  परवाह  नहीं  करता  है  क्योंकि  वासनाओ  से  युक्त  कांटो  की धार क्षीण पड़ जाती है |

पंखुड़ियों  की  सुन्दरता  और  उसकी  मनमोहक  सुगंध  भक्ति  होती  है  और  ईश्वर  की  अनुकंपा  मनुष्य  को  अपनी  ओर आकर्षित  करती  है । मनुष्य  ईश्वर  प्रेम  एवं  अनुकंपा  की  इच्छा  के  सही  मार्ग  में  अपने  अवगुणों  एवं  वासनाओ  कों भोगकर  ज्ञानार्जन  करता  है ।

क्रमिक , अनुशासित  और  नियमित  रामनाम  का  जाप   किसी  के  जीवन  में  उसकी  उन्नति  लायेगा  । अतः  सदैव  नियमित  रूप  से राम नाम  का  जाप  कीजिये